14
Mar
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: असर, आस, इश्क़, गली, ग़म, ढूँढ़ना, दिन, दिल, दोपहर, दफ़्न, प्यार, बाज़ार, बेख़बर, मोहब्बत, शरर, शाम, सहर, ज़हर, dawn, day, effect, evening, graved, heart, hope, love, market, noon, poison, search, sorrow, spark, street, unknowingly. Leave a Comment
मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा
वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा
जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों
उसे दिनो-दोपहर ढूँढ़ता फिरा
आस एक बुझी-बुझी है दिल में
मैं हर गली शरर ढूँढ़ता फिरा
कोई खोदे वह यहीं दफ़्न है
‘नज़र’ जिसे बेख़बर ढूँढ़ता फिरा
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३