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Mar
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: इश्क़, love, eyes, सावन, प्यार, बादल, मोहब्बत, तस्वीर, ख़ाहिश, heaven, desire, पलक, धूल, death, fate, hell, wish, soul, जीवन, life, रोज़, night, जिस्म, body, मन, rain, cloud, जन्नत, day, रोशन, फ़िराक़, रूह, जहन्नुम, meeting, शब, truth, lie, dust, मतलब, photograph, सच, झूठ, विसाल, eyebrow, वहम, अजल, cheating, separetion, imagination, फ़न, artifice, skill, आखें, lighten, शाइरी, poetry, धोखा. 2 Comments
फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना
यह कि झूठ को सच मतलब को मन जाना
वहम की धूल जब गिरी पलकों से
हमने सच और झूठ का सारा फ़न जाना
आँखों से आपकी तस्वीर उतारी न गयी
हमने शबो-रोज़ चाँद को रोशन जाना
जिस्म ख़ाहिशमंद था रूह सुलगती थी
हमने बुझते बादलों को सावन जाना
हम भी शाइरी के फ़न सीखने लगे ‘नज़र’
जबसे जन्नतो-जहन्नुम का चलन जाना
फ़िराक़= separetion, अजल=death, fate, विसाल=meeting
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
Posted by विनय प्रजापति on March 13, 2008 at 11:31 AM
@ MEET, Thanks!!
Posted by MEET on March 13, 2008 at 11:24 AM
अच्छा है भाई. बधाई.