शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना
चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता है…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
March 10, 2008 at 3:36 pm (मेरी त्रिवेणी) (इंतिज़ार, इश्क़, ख़्याल, खिड़की, चाँद, तड़प, पत्ते, प्यार, मोहब्बत, याद, रात, शबनम, फ़ुर्क़त, calling, cry, dew, grief, leaves, love, memory, moon, night, pain, reminisce, separation, thought, waiting, window)
शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना
चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता है…
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