शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर

March 10, 2008 at 3:36 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना

चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता है…


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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