मैंने आँखों को लहू का समन्दर
और दिल को दस्तो-सहरा बनाया
‘नज़र’ को अय्यार पेश सैय्याद
बता तुझको क्या सज़ा मुक़र्रर हो
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
10 Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: anger, अय्यार, आक्रोश, क्रोध, दस्त, दिल, मुक़र्रर, लहू, समन्दर, सहरा, सैय्याद, सज़ा, blood, clever, decide, desert, heart, hunter, jungle, punishment, revenge, sea, witty. Leave a Comment
मैंने आँखों को लहू का समन्दर
और दिल को दस्तो-सहरा बनाया
‘नज़र’ को अय्यार पेश सैय्याद
बता तुझको क्या सज़ा मुक़र्रर हो
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