जब जीना लाज़मी हो जाये
तो सबको सभी को मिटाके जियो
क़द कभी छोटा न हो ‘नज़र’
सबको घुटनों पर झुकाके जियो
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
10 Mar
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: anger, आक्रोश, क्रोध, घुटना, छोटा, झुकाना, मिटाना, लाज़मी, क़द, compulsory, cruelty, height, kill, knee, low, small, standards. Leave a Comment
जब जीना लाज़मी हो जाये
तो सबको सभी को मिटाके जियो
क़द कभी छोटा न हो ‘नज़र’
सबको घुटनों पर झुकाके जियो
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