क्या वह तुम थे
जो आँखों को महका गये
तमन्ना दबी-सी
मेरे दिल में सुलगा गये
मैं कितना तन्हा फिर रहा था
जी रहा था यों कि
रोज़ मर रहा था
तुमने जो धड़कनें जवाँ कीं
मुझको ख़्यालों में उलझा गये
शाम के साथ तुमको देखकर
बेक़ाबू हो गया मैं
क्या कहूँ ख़ुद को
अन्जाम-ए-जुस्त-जू हो गया मैं
दूरियों का यह परदा
उठ जाये ज़रा
तुम अरमान मेरे पिघला गये
यह [...]
Archive for March 7th, 2008
7 Mar




















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