कभी वैसे होता है

कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है
यह प्यार जो होता है,
प्यार ही  रहता  है…

तुमको सब पता है
हमको सब पता है
तुम भी दीवाने हो
हम भी दीवाने हैं
यह सबको पता है
कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है

मस्ती है तुमको भी
मस्ती है हमको भी
तुमको भी चाहत है
हमको भी चाहत है
यह किसकी ख़ता है
कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है

नज़रों का चलना
दिल का मचलना
चलते-चलते फिसलना
गिरते-गिरते संभलना
ऐसा ही कुछ होता है
कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है

जब भी मिलते हैं
साथ-साथ चलते हैं
क्या बातें करते हैं
कहने से डरते हैं
चैन कहाँ मिलता है
कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है

इक़रार गर हो जाये
इज़हार गर हो जाये
हो जाये इक कमाल
हो जाये इक वबाल
ऐसा ही लगता है
कभी वैसे होता है,
कभी ऐसे होता है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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