Archive for March 4th, 2008

तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे

तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे
जैसे मेरी सदा तुम्हें
जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं
मैं कैसे चुनावाऊँ उन्हें
मैं बद से बदतर हुआ जाता हूँ
याद कर-करके तुम्हें
ख़िज़ाँ भी ख़ुशरंग हुई जाती है
खुष्क पत्ते पहने-पहने
शाम कितनी हसीन हो जाती है
पहने के रात के गहने
ऐसी शाम भी सादी लगती है मुझे
यह दर्द क्या पता तुम्हें
अब तो खुष्क पत्तों पर
ओस की तरह [...]

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तुमसे कुछ कहना है

सुनो ज़रा दिल का तुमसे कुछ कहना है
तुम्हारे जैसी लड़की से प्यार करना है
हाँ कर दो, तुम मुझसे प्यार कर लो
मेरा तो सिर्फ़ तुमसे जीना और मरना है
तुम्हारी क़ातिल अदा पर दिल आ गया
तुमसे पहली मुलाक़ात का नशा छा गया
मुझे तुम्हारी नशेमन आँखों में बसना है
तुमसे सनम अब और दूर नहीं रहना है
सुनो ज़रा दिल [...]

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उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें

उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें
सीने में बजती हैं…
ओस की सूखी बूँदें किसकी राहें तकती हैं
पत्थर है दिल फिर भी गलता है
बहता हुआ वक़्त धीरे चलता है
काँच की परछाईं-सा है कुछ पीछे-पीछे
महसूस नहीं होता कुछ आँखें मीचे-मीचे
उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें
सीने में बजती हैं…
दो-दो शक्लें टूटे-से आइने में बहती हैं
बीती हुई गलियों में पाए [...]

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साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया

साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया आँखों में तू
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू
जानाँ मैं तेरे हुस्न का ख़्वार हूँ
तेरी इक झलक को बेक़रार हूँ
तेरे लिए दर-ब-दर भटकता रहा
रात-दिन तेरा नाम रटता रहा
मेरे दिल के अँधेरों में उजालों में तू
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू
यूँ ही दूर से देखूँ कब तलक तुझे
अपनी आँखों में [...]

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