Archive for March 2nd, 2008

तन्हाई मिटाने दो

तन्हाई मिटाने दो
किस्से सुनाने दो
सुबह बह जायेगी
रोशनी उगाने दो
तितलियों के परों-सी
बारिश के घरों-सी
छोटी-सी ज़िन्दगी यह
किताब के हर्फ़ों-सी
आइने में अक्स है
वहाँ कौन शख़्स है
मेंहदी धुल गयी सब
मुझमें नक़्स है
बदली और पवन ने
गुल और चमन ने
मुझको बहकाया है
शिकारी और हरन ने
फ़ुर्क़त में क़ुर्बत जैसे
दर्द में मोहब्बत जैसे
वह याद आये मुदाम
दोस्ती में उल्फ़त जैसे
नाराज़ है कौन यहाँ
हमसे यह [...]

Continue reading »