प्यार से मुझको प्यार चाहिए
गुलाबी लबों से इज़हार चाहिए
उसके हसीं चेहरे पे हँसी चाहिए
उसके लिए हर ख़ुशी चाहिए
उसने मुझको दीवाना बनाया है
मेरी आँखों को आशिक़ाना बनाया है
अब हर शै में वही दिखती है
आँखों में उसका ख़ाब चाहिए
मुझको मेरा माहताब चाहिए
प्यार से मुझको प्यार चाहिए
गुलाबी लबों से इज़हार चाहिए
मेरी धड़कनों में वह धड़कती है
उसके बिना सीने में जान तड़पती है
मुझको उसे अपना बनाना है
मुझको वही एक यार चाहिए
दिल में उसका ख़ुमार चाहिए
उसके हसीं चेहरे पे हँसी चाहिए
उसके लिए हर ख़ुशी चाहिए
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १८ मई २००३




















Posted by sanjay sen sagar on October 29, 2008 at 6:44 PM
विनय जी आपका ब्लॉग काफी देखा काफी पढ़ा और कई बार पढ़ा ..हर बार कुछ न कुछ नया पाया ..मैं चाहता हूँ की आप मेरे ब्लॉग का लिंक अपने ब्लॉग पर लगये और मैं तो निश्चित ही आपके ब्लॉग का लिक अपने ब्लॉग पर देने वाला हूँ और आपने मुझसे वादा किया थ अकी आप प्ब्लोग को अच्छा करने का तरीका बताएँगे !!
आप मुझे मेल करने का कास्ट करे!
Posted by विनय प्रजापति on March 2, 2008 at 9:06 PM
तारीफ़ करने का शुक्रिया…
Posted by mehek on March 2, 2008 at 9:02 PM
मेरी धड़कनों में वह धड़कती है
उसके बिना सीने में जान तड़पती है
मुझको उसे अपना बनाना है
मुझको वही एक यार चाहिए
दिल में उसका ख़ुमार चाहिए
bahut sundar bhav hai panktiyon mein nice one