मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर
मेरे जिस्मो-जाँ को जीवन दे जा ओ बेवफ़ा फिर
इन राहों पर हल्के गुलाबी फूल खिलने लगे हैं
बेज़ुबाँ दिल में मोहब्बत के अरमान जगने लगे हैं
आ निगाहों में आ जा, कर दे धड़कनें रवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर
उदासियाँ, तन्हाइयाँ, मुझसे शिकवे [...]
Archive for February 27th, 2008
27 Feb
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा
27 Feb
मैं तेरा नाम नहीं जाना
मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना
पहली नज़र में होश गुम गया
दूसरी नज़र का हाल कैसे बताऊँ
दिल को आना था तुम पर आ गया
भला दिल को मैं कैसे समझाऊँ
पहले चरचे मेरी यारी के होते थे
अब मैं हो गया ख़ुद से बेग़ाना
मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो [...]
27 Feb
मैं उससे मोहब्बत करता था
मैं उससे मोहब्बत करता था
आज भी करता हूँ
काँच के दिल में जान भरता हूँ
मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में
उसकी ही चाहत है
वह जो है मेरी ज़िन्दगी है
मुझे चैन है राहत है
मैं तन्हा था अकेला था
आज उसके लिए जीता हूँ
आँखों से उसकी प्यार पीता हूँ
सपने हक़ीक़त हो गये हैं
दोनों इक जाँ हो गये हैं
निगाहों से नज़रों [...]
27 Feb
ज़हर पीकर जीने चले
ज़हर पीकर जीने चले
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले
आँसू सूखे हुए थे
पलकों से बरसते हैं
सितारे सारी रात
चाँद को तरसते हैं
एक पूरा दिन पीने चले
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले
महके-महके लगते हैं
गीले पलाश के पल
उड़ती फिरती रहती है
तेरी प्यास की धूल
काग़ज़ी यह आइने जले
कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
27 Feb
ख़ुदा ने जब किसी को
ख़ुदा ने जब किसी को
न कहा अपना ख़ुदा
फिर तूने क्यों कहा
ग़ैर को अपना ख़ुदा
यह तो हद ही कर दी तूने,
यह तो हद ही कर दी तूने!
ग़ैर कभी कोई
एहसान नहीं उठाते
वह तो बस
ईमान को क़त्ल करते हैं
वह तेरा हो या ख़ुद उनका
हर क़दम पे इक नया दरवाज़ा
हर क़दम पे इक नयी चौखट
चौखट से टकराकर
बार-बार गिरता हूँ
काश!
इस [...]




















कहते रहें Comments