ज़ीनत
गुनचे चाँदनी देखकर मुस्कुराने लगे
महक उठी रिदा यह चाँदनी की…
शबनमी रात और भी हसीन हो गयी है
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
February 26, 2008 at 8:16 am (मेरी त्रिवेणी) (इश्क़, गुनचे, चाँदनी, प्यार, महक, मोहब्बत, रात, रिदा, शबनम, हसीन, हुस्न, beautiful, beauty, bud, cover, dew, love, moonlit, night, scent)
गुनचे चाँदनी देखकर मुस्कुराने लगे
महक उठी रिदा यह चाँदनी की…
शबनमी रात और भी हसीन हो गयी है
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