कोई हमसायादार पेड़ नहीं मिला
ज़हर मिले तो ज़हर भी खा लूँ
यह शाम की धूप बहुत कड़ी है…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: इश्क़, धूप, प्यार, मोहब्बत, शाम, हमसाया, ज़हर, ज़िन्दगी, evening, life, love, neighbour, poison, sunlight. Leave a Comment
कोई हमसायादार पेड़ नहीं मिला
ज़हर मिले तो ज़हर भी खा लूँ
यह शाम की धूप बहुत कड़ी है…
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