उफ़! यह छाँव की उमस

February 26, 2008 at 5:25 pm (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

उफ़! यह छाँव की उमस
तौबा यह झूठे फ़साने

उम्मीद की धूप रिस गयी है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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