मौत और मेरे दर्मियान
ज़िन्दगी…
एक हीरे की अंगूठी है
न उंगली में पहन सकूँ
न ज़ुबाँ से चाट सकूँ
मौत और मेरे दर्मियान
बस यही तो है!
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
February 26, 2008 at 8:35 am (मेरी नज़्म) (अंगूठी, मौत, हीरा, ज़िन्दगी, death, diamond, fate, life, ring)
ज़िन्दगी…
एक हीरे की अंगूठी है
न उंगली में पहन सकूँ
न ज़ुबाँ से चाट सकूँ
मौत और मेरे दर्मियान
बस यही तो है!
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