मैं जब दुआ करूँ
मैं जब दुआ करूँ
तुम आमीन कहो
और दुआ क़ुबूल हो जाये
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
February 26, 2008 at 5:16 pm (मेरी त्रिवेणी) (amen, इश्क़, दुआ, प्यार, मोहब्बत, क़ुबूल, love, prayer)
मैं जब दुआ करूँ
तुम आमीन कहो
और दुआ क़ुबूल हो जाये
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Ramesh said,
February 26, 2008 at 8:28 pm
आमीऩ। शुक्रिया। खुशामदीद दोस्त
रमेश
विनय प्रजापति said,
February 26, 2008 at 8:39 pm
शुक्रिया दोस्त!
Ramesh said,
February 26, 2008 at 8:45 pm
आमीन मेरी भी दुआ कबूल हो मेरे दोस्त खुशामदीद!
रमेश
विनय प्रजापति said,
February 26, 2008 at 8:53 pm
इंशा अल्लाह ज़रूर पूरी होगी, मगर है क्या? कुछ पता तो चले!
Ramesh said,
February 26, 2008 at 9:23 pm
मैं तो दोस्त बस सबको दुआऐं ही देता हूँ और यही दुआ कबूल हो कि सब इस छोटी सी ज़िन्दगानी को जीयें भरपूर।
रमेश
Ramesh said,
February 26, 2008 at 9:26 pm
बाबा के चमन की ख्वाहिश ये के
सभी गुल पर बहार आये
ना हो कोई महज़ तन्हा ग़म
बस ऐसी ही बहार आये।
रमेश
mehhekk said,
February 26, 2008 at 9:31 pm
choti si bahut achhi.
विनय प्रजापति said,
February 26, 2008 at 9:41 pm
@रमेश, आप ने जो पंक्तियाँ प्रस्तुत की हैं वह सचमुच एक दुआ है, सच्ची दुआ!
@महक, धन्यवाद!
Ramesh said,
February 26, 2008 at 9:58 pm
हर इक शै पर बहार आये
दिल को जोड़ती जो हो
ना हो रुसवाई का आलम
सिर्फ प्यार की ही खुशुबू
और वो शामे-बहार आये
रमेश
विनय प्रजापति said,
February 26, 2008 at 10:10 pm
रमेश, क्या आपका अपना कोई ब्लॉग है, यदि हाँ तो लिंक दे!
Ramesh said,
February 26, 2008 at 10:11 pm
धन्यवाद विनय तुमने शुरुआत ही इतनी बढ़िया दुआ से की कि…..
रमेश
विनय प्रजापति said,
February 26, 2008 at 10:27 pm
कि…. अधूरा वाक्य है पूरा करोगे क्या?
Ramesh said,
February 27, 2008 at 8:38 pm
कि……मुझसे रहा ही ना गया कि लिखता ही गया। दोस्त मेरा कोई ब्लाग नही है बस जहाँ कुछ अच्छा दिल को छू जाने वाला पढ़ने को मिलता है दाद देता हूँ कि ऐसे अच्छे इन्सान भी बनाये हैं उस खुदा ने इस जहाँ में…..विनय भाई जैसे…
रमेश