मैं जब दुआ करूँ
तुम आमीन कहो
और दुआ क़ुबूल हो जाये
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: amen, इश्क़, दुआ, प्यार, मोहब्बत, क़ुबूल, love, prayer. 13 Comments
मैं जब दुआ करूँ
तुम आमीन कहो
और दुआ क़ुबूल हो जाये
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Posted by Ramesh on February 27, 2008 at 8:38 PM
कि……मुझसे रहा ही ना गया कि लिखता ही गया। दोस्त मेरा कोई ब्लाग नही है बस जहाँ कुछ अच्छा दिल को छू जाने वाला पढ़ने को मिलता है दाद देता हूँ कि ऐसे अच्छे इन्सान भी बनाये हैं उस खुदा ने इस जहाँ में…..विनय भाई जैसे…
रमेश
Posted by विनय प्रजापति on February 26, 2008 at 10:27 PM
कि…. अधूरा वाक्य है पूरा करोगे क्या?
Posted by Ramesh on February 26, 2008 at 10:11 PM
धन्यवाद विनय तुमने शुरुआत ही इतनी बढ़िया दुआ से की कि…..
रमेश