मैं अगर एक तरफ़ा हूँ
मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही
इस बद्तर ज़िन्दगी में यह क्या कम है
हर शय तेरे सिवा कुछ दिखता ही नहीं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
February 26, 2008 at 8:07 am (मेरी त्रिवेणी) (इश्क़, एक तरफ़ा, ग़म, प्यार, बद्तर, मोहब्बत, शय, ज़िन्दगी, life, love, one sided, sorrow, thing, worst)
मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही
इस बद्तर ज़िन्दगी में यह क्या कम है
हर शय तेरे सिवा कुछ दिखता ही नहीं
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