मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही
इस बद्तर ज़िन्दगी में यह क्या कम है
हर शय तेरे सिवा कुछ दिखता ही नहीं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: ज़िन्दगी, इश्क़, love, प्यार, मोहब्बत, life, ग़म, sorrow, worst, एक तरफ़ा, one sided, बद्तर, शय, thing. Leave a Comment
मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही
इस बद्तर ज़िन्दगी में यह क्या कम है
हर शय तेरे सिवा कुछ दिखता ही नहीं
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