मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा
‘नज़र’ को मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा
ऐसा भी क्या गुनाह उसका, जो…
मोहब्बत में न’कामयाब बैठा रहे
मग़फ़रत= मुक्ति, मोक्ष, moksa
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
February 26, 2008 at 7:43 am (मेरी त्रिवेणी) (इश्क़, love, प्यार, मोहब्बत, ख़ुदा, नज़र, good, moksa, मग़फ़रत, गुनाह, nazar, guilt, नाकामयाब, looser)
‘नज़र’ को मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा
ऐसा भी क्या गुनाह उसका, जो…
मोहब्बत में न’कामयाब बैठा रहे
मग़फ़रत= मुक्ति, मोक्ष, moksa
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