‘नज़र’ को मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा
ऐसा भी क्या गुनाह उसका, जो…
मोहब्बत में न’कामयाब बैठा रहे
मग़फ़रत= मुक्ति, मोक्ष, moksa
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: इश्क़, ख़ुदा, गुनाह, नाकामयाब, नज़र, प्यार, मग़फ़रत, मोहब्बत, good, guilt, looser, love, moksa, nazar. Leave a Comment
‘नज़र’ को मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा
ऐसा भी क्या गुनाह उसका, जो…
मोहब्बत में न’कामयाब बैठा रहे
मग़फ़रत= मुक्ति, मोक्ष, moksa
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