क्यों लोग यहाँ जमा हैं?
क्यों वह उदास बैठा है?
कुछ तो बोलो! मेरी साँसें उखड़ रही हैं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: उदास, लोग, साँस, breath, people, sad. Leave a Comment
क्यों लोग यहाँ जमा हैं?
क्यों वह उदास बैठा है?
कुछ तो बोलो! मेरी साँसें उखड़ रही हैं
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