कितने दिन हुए कोई टूटता सितारा नहीं देखा
मेरे हश्र को एक यह बुनियाद और सही…
क्या तू अब भी मुझे अपनी दुआ में माँगती है?
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: इश्क़, दुआ, प्यार, बुनियाद, मोहब्बत, सितारा, हश्र, end, foundation, love, prayer, star. Leave a Comment
कितने दिन हुए कोई टूटता सितारा नहीं देखा
मेरे हश्र को एक यह बुनियाद और सही…
क्या तू अब भी मुझे अपनी दुआ में माँगती है?
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