अंधी ख़ला में
हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में
किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा
शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
February 26, 2008 at 9:16 am (मेरी त्रिवेणी) (अंधी, आतिश, इंतकाल, ख़ला, चाँद, सितारे, bang, blind, dark, death, fire, space, stars, vacua, vacuum)
हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में
किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा
शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का
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