हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में
किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा
शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
26 Feb
Posted by विनय in मेरी त्रिवेणी. Tagged: चाँद, आतिश, सितारे, death, dark, fire, stars, अंधी, ख़ला, इंतकाल, blind, space, vacua, vacuum, bang. Leave a Comment
हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में
किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा
शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का
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