अंगीठी में सुलगता कोयला

February 26, 2008 at 9:41 am (मेरी त्रिवेणी) (, , , , , , , , , , , )

अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे
तब जाकर धुँआ ज़रा कम उठेगा

आँसू अपनी आँख के सब पोंछ दो


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

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