वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की मुझको सज़ा दे
दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे
अरमान पिघलकर ख़त्म न हो जायें
दिल में साँसें दफ़्न न हो जायें
अपने सीने से लगा ले मुझे
दिल में अपने मुझको जगह दे
तेरी राहों पर निगाह है मेरी
मेरे दिल में सिर्फ़ चाह है तेरी
मेरे [...]
Archive for February 26th, 2008
26 Feb
वह मौसम इक बार
26 Feb
ख़ामोश निगाह तेरी
ख़ामोश निगाह तेरी
क्या बातें करती है
आँखों में रहती है
व नींदों में बहती है
दिल की बात करें क्या
एक सपने का बंजारा है
भटक रहा है सदियों से
तेरे प्यार का मारा है
ख़ामोश निगाह तेरी
क्या बातें करती है…
नाम लिया है तुमने
किसका अनजाने में
जान छलक उठी है
मेरे दिल के पैमाने में
ख़ामोश निगाह तेरी
क्या बातें करती है…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: [...]
26 Feb
कभी तुम घर आओ ना
कभी तुम घर आओ ना
नाम से मुझे बुलाओ ना
हमें यह वादा दे दो
आओ तो फिर जाओ ना
अपनी हँसी से यह घर सजा दो
प्यार के फूल दिल में खिला दो
दीप मन में जलाओ ना
कभी तुम घर आओ ना
नाम से मुझे बुलाओ ना
फेरे यह ऐंवे कब तक चलेंगे
जिस्म और जान कब मिलेंगे
रात अंधेरी बुझाओ ना
कभी तुम घर आओ [...]
26 Feb
ना जीने को जी करता है
ना जीने को जी करता है
ना मरने को जी करता है
तू नहीं है जो साथ मेरे
साथ रहने को जी करता है
खो गया हूँ तन्हाइयों में कहीं
न कोई शाद है न दर्द है कहीं
बिछायी-बिछायी काँटों की तह है
ख़ुद को पिरोने को जी करता है
यह दिन के उजाले ख़ारे हैं
धीरे-धीरे यादों में गुज़ारे हैं
रात मुट्ठी में रेत-सी [...]
26 Feb
जब कभी वह शाम
जब कभी वह शाम मुझे याद आयी
मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी
माना आज शाम का वह रंग नहीं
और मेरी जान तू भी मेरे संग नहीं
मगर दिलो-ज़हन से हर वक़्त
तेरे ख़ाबो-ख़ाहिश में फ़रियाद आयी
जब कभी वह शाम मुझे याद आयी
मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी
ढलती गुलाबी शाम मुझसे कहती है
सिर्फ़ एक तू मेरे दिल में रहती [...]




















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