तुमको लौट के यहीं आना है

February 24, 2008 at 3:52 am (मेरा गीत) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)
तुम मानो या न मानो
मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है)
तुम मानो या न मानो

एक इल्ज़ाम देकर जा रहे हो ग़ैर की बाँहों में
कभी तो तुम्हें उसको ठुकराना है
तुम मानो या न मानो

हम दोस्त थे तुमने अदू मान लिया जाने दो
मुझे आज रब को भी आज़माना है
तुम मानो या न मानो

देखता हूँ यह रंग यह तेवर कब तलक हैं
तुमको ख़ुद चलके मेरे पास आना है
तुम मानो या न मानो

जो गिरह तुमने ख़ुद डाली हमारे रिश्ते में
उसको तुम्हें दुनिया से छुपाना है
तुम मानो या न मानो


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १४ अप्रैल २००३

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