इक चाँद है आसमाँ में
इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन
चाँद जो वह आसमाँ पर है
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं
लेकिन नज़र में तुम नहीं
तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये
इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन
नग़मा जो वह ज़ुबाँ पर है
कलमा जो वह दिलो-जाँ पर है
बेवफ़ा, सुनो मेरे दिल की सदा
तेरे लिए ही है मेरी वफ़ा
तुमसे ही मेरा जहाँ, तुम मेरी हमनवाँ
एतबार मेरा कर ले मुझे बाँहों में भर ले
इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

santosh007 said,
February 20, 2008 at 8:05 am
I love this…