Archive for February 19th, 2008

ब्रह्माण्ड

मैं अत्यन्त अकेला था
अनन्त शून्य था मेरे अन्दर
यूँ ही विचार आया मन में
अपना भी हो एक सुन्दर घर
कुछ न कुछ बटोरकर
जैसे-तैसे आदि परमाणु रचा
बहुत लम्बी प्रतीक्षा के पश्चात
वह सुन्दर दृश्य दिखा
एक धमाके के पश्चात
छितर गया सब बहुत दूर तक
और खिसकता ही रहा है
शून्य के अन्तिम छोर तक
उभरी एक अनोखी आभा
उस विस्फोट की छितर से
बनाया सबने अपना [...]

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इक चाँद है आसमाँ में

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन
चाँद जो वह आसमाँ पर है
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं
लेकिन नज़र में तुम नहीं
तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये
इक चाँद है आसमाँ में [...]

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रक़ाबी चाँद जला दो

रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाये
कभी तो पास बुला लो
तेरी नज़दीकियों का
मुझे एहसास हो जाये
गुलाबी शाम ढलती है
रोज़ गुज़रती हो
मेरे घर के सामने से
मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ
आइना जब भी हो हाथों में
उससे तेरी बातें करता हूँ…
रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाये
एक रिश्ता बना लो
मुलाक़ात लाज़मी हो जाये
तेरे सिले [...]

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बिछड़ के रहना सीख लिया है

बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने
बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने…
क्या वहाँ तक, वहाँ तक
मेरी आवाज़, मेरी सदा जाती नहीं
क्या वहाँ तुझे, वहाँ तुझे
मेरी बातें, मेरी याद सताती नहीं
बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने
बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने…
हर तरफ़ तू नज़र आती [...]

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ख़ामोशी ही ख़ामोशी है

ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में
तन्हाई है तन-मन में,
ख़ाबों का आशियाँ बनाया था हमने
वह बिखरा पड़ा है यहीं-कहीं पे,
फूल-पत्तों का मौसम जा चुका है
पतझड़ लगा है बरसने…
पीले पत्ते लगे हैं गिरने…
ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में
मौसम के फूलों में [...]

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