जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से
कुछ न कुछ बात तो सभी में थी
पर हसीना तेरी कुछ और ही बात है

ख़ुदाया यह कितना हसीन इत्तिफ़ाक़ है
तेरे जैसी ख़ूब-रू हसीना मेरे साथ है
गोरा-गोरा रंग तेरा क़ातिल हैं निगाहें
जबसे देखा तुझे चाहा थामूँ तेरी बाँहें

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से

रूप तुम्हारा ऐसा हम फ़िदा हो गये
जबसे देखा तुम्हें हम दिलरुबा खो गये
सुर्ख़-गीले होंठ तेरे, जैसे गुलाब खिले
दिल गया मेरा काम से तुम ऐसे मिले

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से

सुन नौ-जवाँ प्यार का इश्क़ नाम है
डूबें तुझमें हमें और क्या काम है
ख़ुदा ने नवाज़ा तुझे बेपनाह हुस्न से
कैसे न हम तेरा हर पल दीदार करें

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

2 Responses to this post.

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  2. Posted by manish on February 20, 2008 at 1:54 PM

    कितना ख़ूबसूरत गीत है…

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