हाल दिल का बताना तुमसे

February 18, 2008 at 8:35 pm (मेरा गीत) (, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , )

हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है
हर लम्हा ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से दूर करता है
जाने किस रफ़्तार दोनों का दिल शोर करता है

जाने अन्जाने मुझसे कितनी गुस्ताखियाँ हो गयीं
हम क्यों समझ न पाये और आप दूर होती गयीं 
थोड़ी-थोड़ी दोस्ती न जाने कब मोहब्बत बन गयी
एक फूल खिला और सारी फ़िज़ा जन्नत हो गयी

हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है

वही समझता है यह इश्क़ जो इश्क़ का मारा है
समझे पाये बहुत देर से हम, यह कच्चा सहारा है
पलकें भारी हो जाती हैं कोशिश करते हैं जागने की
कैसी ज़िन्दगी है ज़रूरत पड़ती है साँसें माँगने की

हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

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