यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात
जैसे यह कोरे हैं वैसे मेरे दिन-रात
अपनी मुलाक़ात कब मुकम्मल हुई थी
दर्द मेरे दिल में बढ़ते रहे इफ़रात…
इन अफ़सानों में अपना एक किरदार है
ज़ुबाँ से निकला हर लफ़्ज़ किरायेदार है
गुज़रती तारीख़ों में तेरी राह तकते हैं
यह फ़ैसला कैसे हो किस पे एतबार है
यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल [...]
Archive for February 16th, 2008
16 Feb
यह कोरे काग़ज़
16 Feb
जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का
जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का
जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम
जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम
तेरा एहसास था कभी दिल के पास
तू क्यूँ तोड़ गया जीने की हर आस
नहीं थी उन गुलों में ख़ुशबू ज़रा भी
वह भीगे हुए गुल थे जैसे पलाश
जुस्त-जू की छाया खो जाती है [...]
16 Feb
यह बीते हुए लम्हों का शोर है
यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं
उसने इजाज़त नहीं दी है हमें
उन लम्हों को दोबारा पढ़ने की
गुज़रें है वह कभी इधर से
यह बात भुला देने भूलने की
मेरे दरवाज़े तक राह आती है
मगर खुलती है कहीं और यह
समझाते हैं कभी [...]
16 Feb
प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है
प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है
उड़ जाये होश खो जाये दिल
कुछ ऐसा काम कर जाता है
मेरे सपनों में कोई आने लगा
देने लगा मुझको कोई सज़ा
एतबार क्यों ख़ुद पर न रहा
वह मेरा यह हाल कर गया
हो गया प्यार हो गया प्यार
मुझको उससे प्यार हो गया
प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है
उड़ जाये होश खो जाये दिल
कुछ ऐसा [...]
16 Feb
तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा
साहिबा, साहिबा, साहिबा
तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा
साहिबा, साहिबा, साहिबा
तू मेरे प्यार की सुबह
तुझको ढूँढ़ती मेरी निगाह
क़ातिलाना तेरी हर अदा
मार न डाले कहीं दिलरुबा
साहिबा, साहिबा, साहिबा
साहिबा, साहिबा, साहिबा
जवानी के जोश में जवाँ
हो न जाये कोई ख़ता
वाक़िफ़ नहीं तू मेरे इश्क़ से
हमनज़र बचके जायेगी कहाँ
साहिबा, साहिबा, साहिबा
साहिबा, साहिबा, साहिबा
तू जान है मेरे जिस्म की
कैसे रहेगी मुझसे जुदा
देख [...]




















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