Archive for February 13th, 2008

पहली बार देखा तुमको

पहली बार देखा तुमको
जाने क्या हुआ
दिल की धड़कनों का
हल्का-हल्का एहसास हुआ
डूब गया मैं तेरी आँखों में
जाने-मन जाने-जानाँ
तुमने मेरा चैन ले लिया
वह तेरी पहली नज़र
जाने-मन जाने-जानाँ
यह दिल मेरा खो गया
पहली बार देखा तुमको
जाने क्या हुआ
दिल की धड़कनों का
हल्का-हल्का एहसास हुआ
जब तक देखूँ न तुमको
दिल क़रार पाता नहीं
जाने कैसा तुमने जादू किया
जाने कैसा तुमने दर्द दिया
पहली बार [...]

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तुम हो मेरी चंद्रकला

अम्बर में जब चाँद खिला
उस पल से चला जानाँ
एक नया सिलसिला
मुहब्बत भरी वादियों में
इक नया गुल खिला
तुम एक नया सिलसिला
तुम जान मेरी अजंता
जिस पर यह दिल मचला
वह तुम हो मेरी चंद्रकला
फ़िज़ाओं में जादू घुला
जब तुमको देखा ऐसा लगा
मेरा जीवन जैसे शिला
अम्बर में जब चाँद खिला
उस पल से चला जानाँ
एक नया सिलसिला
तुम मेरा माहताब
तुम पानी में [...]

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यह यादें तो ऐसी हैं

यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं
जब तक अंधेरे में चलते रहे
तब तक हम दोनों साथ नहीं
जहाँ उजालों की ओर मुड़े
फिर से मेरे दिल पर आयीं
यह यादें वह तो नहीं
जिनको काग़ज़ पर लिखकर मिटा दें
यह वह लम्हे तो नहीं
जिनको कहानियाँ समझकर भुला दें
यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं
जब तक अंधेरे में चलते [...]

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मेरी बाइसे-ज़ीस्त

मेरी बाइसे-ज़ीस्त,
तुमको इक नज़र देखने के बाद मैं क्यों मुदाम तुम्हारी जानिब खिंचता रहता हूँ? क्यों इक कशिश मुझको बारहा तुम्हारे तस्व्वुर के दाम में बाँध लेती है? क्यों तुम शबो-रोज़ कभी ख़्यालों की भीड़ में कभी ख़ाबों के चमन में मुझे मिल जाती हो? क्यों मुझे हर शय तुम्हारा ही अक्स लगती है? क्यों [...]

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मेरे दिलसिताँ

मेरे दिलसिताँ,
तुम्हें देखकर मुझे पहली बार यूँ लगा था कि मेरी ज़िन्दगी मेरे सामने खड़ी है| मेरे बदन में साँस पहले भी थी मगर मुझे उसका एहसास नहीं था| तुम्हें देखकर मेरी धड़कनें जो रवाँ हुईं तो मैंने जाना कि आज तक मैं साँस क्यों ले रहा था| शायद वह तुम्हीं हो, शायद क्यों हाँ [...]

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