हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं

हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं
तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं
लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है
तुमको देखकर जाने क्या हो जाता है
दिल धड़कता है, वक़्त थम जाता है

तेरा हाथ जब मेरे हाथों में होता है
दिल कुछ कहने को बेताब होता है
लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है
कभी सोचता हूँ कह दूँ आइ लव यू
फिर सोचता हूँ जवाब क्या देगी तू

हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं
तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं
लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है
तुमको देखकर जाने क्या हो जाता है
दिल धड़कता है, वक़्त थम जाता है

रोज़ रात जब चाँद निकलता है
कहता है दिल उनसे मोहब्बत करता है
हाँ, केवल तुमसे प्यार करता है
मेरे दिल की दीवारों पर तेरा नाम है
तुमसे ही रंग पाती मेरी हर शाम है

हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं
तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं…


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

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