खोया-खोया फिरता हूँ

February 9, 2008 at 3:56 pm (मेरा गीत) (, , , , , , , , , , , , , , )

खोया-खोया फिरता हूँ
तेरे बिना ज़िन्दगी
तू जो मिल जाये मुझे
सँवर जाये ज़िन्दगी

तू नहीं तो कुछ नहीं
कुछ भी नहीं
क़सम है तुझे मेरी
अब आ भी जा

तू गयी इतनी दूर
मैं रहा तुझको ढूँढ़
प्यार का है असर
ओ मेरी जाने-जिगर

बस मेरी है तू
प्यार है इक इम्तिहाँ
खो गयी है तू
जान हो गयी इन्तिहाँ

खोया-खोया फिरता हूँ
तेरे बिना ज़िन्दगी

तू कहाँ है बता
ओ मेरी दिलरुबा
तेरे बिना रूठ गयी
मुझसे हर ख़ुशी

ओ चाँदनी मेरी
तुझसे ही मेरी ख़ुशी
अब आ भी जा
ओ मेरे हमनशीं

खोया-खोया फिरता हूँ
तेरे बिना ज़िन्दगी
तू जो मिल जाये मुझे
सँवर जाये ज़िन्दगी


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

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