मैं मंज़िल से दूर सही
मैं मंज़िल से दूर सही
ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ
बेवजह ही सही लेकिन
किसी से मुहब्बत करता हूँ
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१
February 6, 2008 at 12:40 am (फुटकर कलाम) (इश्क़, ख़ाब, घरौंदा, प्यार, मंज़िल, मुहब्बत, मोहब्बत, dream, final destination, home, love)
मैं मंज़िल से दूर सही
ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ
बेवजह ही सही लेकिन
किसी से मुहब्बत करता हूँ
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