मैं मंज़िल से दूर सही
ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ
बेवजह ही सही लेकिन
किसी से मुहब्बत करता हूँ
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१
6 Feb
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, ख़ाब, घरौंदा, प्यार, मंज़िल, मुहब्बत, मोहब्बत, dream, final destination, home, love. Leave a Comment
मैं मंज़िल से दूर सही
ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ
बेवजह ही सही लेकिन
किसी से मुहब्बत करता हूँ
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