ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा
मेरी फ़ितरत तो मुहब्बत देने की रही है
दूर रहना उनकी आदत में शामिल होगा
मेरी आदत तो ख़ुशबू लुटाने की रही है
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१
6 Feb
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: आदत, इश्क़, ख़ुशबू, प्यार, बिछोह, मुहब्बत, मोहब्बत, शामिल, ग़म, फ़ितरत, fragrance, habit, include, love, pain, sorrow. Leave a Comment
ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा
मेरी फ़ितरत तो मुहब्बत देने की रही है
दूर रहना उनकी आदत में शामिल होगा
मेरी आदत तो ख़ुशबू लुटाने की रही है
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