रहूँ मैं कैसे जुदा
मैं जुदा रह नहीं सकता
सहूँ मैं कैसे दर्द
मैं दर्द सह नहीं सकता
इश्क़ ने ऐसा मारा
अब मैं मर नहीं सकता
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१
5 Feb
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: इश्क़, जुदा, दर्द, प्यार, मोहब्बत, breakup, love, pain, separation. Leave a Comment
रहूँ मैं कैसे जुदा
मैं जुदा रह नहीं सकता
सहूँ मैं कैसे दर्द
मैं दर्द सह नहीं सकता
इश्क़ ने ऐसा मारा
अब मैं मर नहीं सकता
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