रहूँ मैं कैसे जुदा
रहूँ मैं कैसे जुदा
मैं जुदा रह नहीं सकता
सहूँ मैं कैसे दर्द
मैं दर्द सह नहीं सकता
इश्क़ ने ऐसा मारा
अब मैं मर नहीं सकता
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१
February 5, 2008 at 8:32 am (फुटकर कलाम) (इश्क़, जुदा, दर्द, प्यार, मोहब्बत, breakup, love, pain, separation)
रहूँ मैं कैसे जुदा
मैं जुदा रह नहीं सकता
सहूँ मैं कैसे दर्द
मैं दर्द सह नहीं सकता
इश्क़ ने ऐसा मारा
अब मैं मर नहीं सकता
XHTML · CSS · Theme: Dusk by Beccary. Blog at WordPress.com.