कभी हम मौसम थे
कभी ख़ुद मौसम था
सावन की चाह में
इक सावन मिला
तो दूसरा गया
आजकल अकेला हूँ
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१
5 Feb
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: alone, अकेला, इश्क़, प्यार, मोहब्बत, मौसम, सावन, deceived, love, pain, rainy season, season. Leave a Comment
कभी हम मौसम थे
कभी ख़ुद मौसम था
सावन की चाह में
इक सावन मिला
तो दूसरा गया
आजकल अकेला हूँ
विनय प्रजापति 'नज़र'
Vinay Prajapati 'NAZAR'
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