Archive for February 4th, 2008

छोटी-छोटी बातें होतीं

छोटी-छोटी बातें होतीं
मीठे-मीठे पल होते
छोटे-छोटे फूल चुनते
गीले-गीले पत्ते होते
ख़ुशियाँ रातभर खेलतीं
हँसी होंठों पर बैठती
तेरी आँखों को पढ़ते
जब कभी तू रूठती
ऐसा होता जो कभी
आँखों में मिसरी होती
ऐसा होता जो कभी
होंठों पर उतरी होती
छोटी-छोटी बातें होतीं
मीठे-मीठे पल होते
छोटे-छोटे फूल चुनते
गीले-गीले पत्ते होते
पुरवाई में जिस्म ठण्डाते
हाथ में हाथ गरमाते
मैं कहता शेर तुमपे
और तुम शरमा जाते
ख़ुशबू होती जिस्मों की
आँच [...]

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कहीं दिलों के गुलाब खिले हैं

कहीं दिलों के गुलाब खिले हैं
दो सौंधे जिस्मों की ख़ुशबू आती है
आँखों में चाँद चमक उठा है
इस नूर से और बे-तस्कीं होती है
देख रहा हूँ तेरे चेहरे को
नज़र हटती नहीं जी भरता नहीं
तुम हाथ छुड़ा भी लो तो क्या
तुमको बाँहों में जकड़ ही लूँगा
तुमसे हैं जो अरमान उगे हैं
इश्क़ का ज़ोर-ज़बर है पीछे लगे हैं
ख़ानाबदोश [...]

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मुझे यक़ीं था मेरे खु़दा

मुझे यक़ीं था मेरे खु़दा
है तू गर पत्थरों में भी
तेरा दिल पत्थर न होगा
एहसाँ तेरा न भूलूँ मैं
तमाम जनम, मुझे उसका
और उसको मेरा कर दे
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२ 

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