मुझे यक़ीं था मेरे खु़दा
है तू गर पत्थरों में भी
तेरा दिल पत्थर न होगा
एहसाँ तेरा न भूलूँ मैं
तमाम जनम, मुझे उसका
और उसको मेरा कर दे
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२
4 Feb
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Leave a Comment
मुझे यक़ीं था मेरे खु़दा
है तू गर पत्थरों में भी
तेरा दिल पत्थर न होगा
एहसाँ तेरा न भूलूँ मैं
तमाम जनम, मुझे उसका
और उसको मेरा कर दे
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