आँखों पे आइना क्यों
चमकाती हो
कहो तो यह आइना
ख़ाब पे रख लूँ
मगर शर्त यह है
सदा रू-ब-रू रहो
कई बार जब शाम
को आँख लगी
तो देखा वह आइना
ख़ाब ही पे रखा है
और रू-ब-रू
तुम बैठी हुई हो
दरवाज़े पर जब
कोई दस्तक हुई
तो ख़ाब ही में
उठकर चल दिया
कि शायद तुम हो
दरवाज़े पर…
अकसर मेरे साथ
यूँ ही होता है
कि एहसास
छू के जाता है तेरा
उस [...]
Archive for February 2nd, 2008
2 Feb
आँखों पे आइना क्यों
2 Feb
तुम जब भी आती हो
तुम जब भी आती हो
साथ में इक नूर लाती हो
नहीं तो आँखों में
इक रात दबाये फिरता हूँ
जलता हूँ मैं शमा पर
परवानों की तरह मचलकर
दोस्तों यारों से अपना
हाले-दिल छुपाये फिरता हूँ
आपकी गुलाबी आँखों की मय
व सुर्ख़ होंठों के तब्बसुम में
अपने आप से बेख़बर
ख़ुद को भुलाये फिरता हूँ
महजबीनों में हसीं बहुत होंगे
पर आप-सा नहीं कोई ख़ूब-रू
तभी तो [...]
2 Feb
आज की रात मेरे ख़ाबों के मकाँ पे
आज की रात मेरे ख़ाबों के मकाँ पे
उस गहरे नीले आसमाँ पे
वह चाँद नहीं निकला
कि तुम आये थे
बे-नूर वह चाँद नूर देखता रहा
सारी रात नहीं निकला
कि तुम आये थे
हाथों में तितलियाँ
रख लीं हों जैसे
कुछ इस क़दर मुस्कुरा रहे थे
मैं किसी नज़्म के लिये
डूबा था जैसे
तुम इस क़दर रिझा रहे थे
जागा नहीं मैं पलभर को भी
आँखों [...]
2 Feb
I’m down with love
Be stupid, idiot, fool
These are three rules
To be down with love
I’m down with love
I’m down with love
Everything you said
I accepted
When I said I love you
You rejected
It’s not fair, it’s not good
I’m down with love
I’m down with love
Be stupid, idiot, fool
These are three rules
To be down with love
My love always
Occupies your heart
But you’re trying
To be smart, [...]
2 Feb
अजनबी-अजनबी आँखें हैं
अजनबी-अजनबी आँखें हैं
अजनबी-अजनबी चेहरे हैं
कोई शिकन नहीं मुस्कुराहट नहीं
अजनबी जो ठहरे हैं
इक वक़्त था आँखों में
इक वक़्त है आँखों में
कैसे पढ़ते आँखों को
आँखों के रंग जो गहरे हैं
कल भी ख़ामोशियाँ थीं
आज भी ख़ामोशियाँ हैं
तुमने कहा नहीं कुछ भी
लबों पे क्यों यह पहरे हैं
अजनबी-अजनबी आँखें हैं
अजनबी-अजनबी चेहरे हैं
कोई शिकन नहीं मुस्कुराहट नहीं
अजनबी जो ठहरे हैं
आये थे [...]




















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