Archive for January 31st, 2008

बहते थे जो कल

बहते थे जो कल
आज वह पल ठहरे हैं
हम कल भी तेरे थे
हम आज भी तेरे हैं
ज़िन्दगी से शिकवा नहीं
मौत ने मोहलत दी है
तेरी इक झलक थी
जिसके लिए क़िस्मत बदली है
कल भी होश नहीं था
आज भी होश नहीं है
मगर तेरा चेहरा
पलकों में आज भी है
तुम ख़ुदा की इबादत हो
तुम उसकी इनायत हो
जो लिखी गयी शिद्दत से
तुम [...]

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चाँद हसीं हो तो रात हसीं होती है

चाँद हसीं हो तो रात हसीं होती है
नब्ज़ चले तो साँस फँसी होती है
कोई वादा कोई इरादा करके आना होता है
जिस्म से जान का फ़साना होता है
मैंने एक बार एक चाँद माँगा था रब से
अब उस चाँद से दूर रहना होता है
आज तो अँधेरे चलते है पलकों के तले
उजालों का कहीं और झिलमिलाना होता है
सुना [...]

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कोई बुला रहा है

कोई बुला रहा है,
हमको जाना होगा
उसकी दो आँखों में,
मेरा आशियाना होगा
पलकों पे दो ख़ाब होंगे
एक उसका होगा
एक मेरा होगा
जब दोनों मिलेंगे
चाँद जलता होगा
सौंधा-सौंधा सवेरा होगा
बैठेंगे जब
उन चट्टानों पर
जिन पर
लहरें आती होंगी
ढलती हुई शामें होंगी
और मेरे काँधे पे
सिर उसका होगा…
हल्के-हल्के
नर्म-नर्म
ख़ाब रोज़ देखेंगे
जब मेरे हाथों में
हाथ उसका होगा…
कोई बुला रहा है
हमको जाना होगा…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन [...]

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जाने क्या है माज़ी में

जाने क्या है माज़ी में
जो धड़कता है,
कोई इन गलियों में
अकेला भटकता है…
मोहब्बत क्या है
पतझड़ या बहार है
बदला नहीं जो सदियों में
वह प्यार है…
कुछ मरासिम हम
आज भी निभाते हैं
सदा तस्व्वुर में
तेरा चेहरा पाते हैं…
जाने क्या है माज़ी में
जो धड़कता है,
कोई इन गलियों में
अकेला भटकता है…
रहते थे जहाँ वह
आज उस आशियाँ पे
बेलों का डेरा है,
कहते थे यह [...]

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