ढूँढ़ता हूँ रास्तों में हर कहीं
बस तुझे, बस तुझे
एक नज़र दिखाकर छुप गयी हो
तुम मुझे, तुम मुझे
जब पत्ते उड़ते हैं ऊँचाइयों से गिरके
और हवा उन्हें उड़ा ले जाती है
दूर कहीं, दूर कहीं
तब मुझमें जीने की ख़ाहिश आती है
सोचकर तुझे, बस तुझे
ढूँढ़ता हूँ रास्तों में हर कहीं
बस तुझे, बस तुझे
एक नज़र दिखाकर छुप गयी हो
तुम मुझे, [...]
Archive for January 27th, 2008
27 Jan
ढूँढ़ता हूँ रास्तों में हर कहीं
27 Jan
अब तो लौट आ
अब तो लौट आ
सुन ले दिल की सदा
अब तो लौट आ
सुन ले दिल की ज़रा
मेघा भी छाये हैं
आब यह बरसाये हैं
तू रेगिस्तानों की
मरीचिका बनकर
क्यों मुझे सताये है
परछाइयों को
आइनों में रख दे
आइने से बाहर आ
अब तो लौट आ
सुन ले दिल की वफ़ा
अब तो लौट आ
सुन ले दिल की रज़ा
वादियों में हरियालियाँ हैं
दिलों में ख़ुशहालियाँ हैं
मुझको क्यों [...]
27 Jan
किसी जाने से क्या बदल जाता है
किसी जाने से क्या बदल जाता है
बस दिल बदल जाता है
अपना दिल बदल जाता है
छत पर खड़े होते थे
बहती पुरवाई में तेरी ख़ुशबू होती थी
आज भी बहती है वह
लेकिन उदास बातें करती है वह…
किसी के जाने से क्या बदल जाता है
अपना दिल बदल जाता है
आइने में जैसे देखते थे ख़ुद को
वह नज़रिया बदल जाता है…
बेलों [...]
27 Jan
जाने कहाँ खो गयी तू
जाने कहाँ खो गयी तू
दूर मुझसे हो गयी तू
ढूँढ़ रहा हूँ…
दीवानों की तरह मैं तुझको
सोच ज़रा क्या मेरा हाल है
क्या तेरा भी होगा ऐसा ही
मेरे जैसा ही…
जाने कहाँ खो गयी तू
दूर मुझसे हो गयी तू
पागल हुआ…
मेरा अफ़साना बना
मैं तेरा परवाना बना
इश्क़ में जला दे मुझे
गले से लगा ले मुझे
कर दे कुछ ऐसा ही…
जाने कहाँ खो [...]
27 Jan
रात का सिरा, जाने कहाँ गिरा
रात का सिरा जाने कहाँ गिरा
हमने तो चाँद जलाया है
हमने तो चाँद जलाया है
रात गुज़री नहीं दिन आया नहीं
हमने तो ख़ाब सजाया है
हमने तो ख़ाब सजाया है
जब भी टूटा कोई सितारा
हमने तुम्हें ही माँगा है
दिल के झरोखों में आज भी
तेरी मोहब्बत का साया है
रात का सिरा, जाने कहाँ गिरा
हमने तो चाँद जलाया है
और हम ढूँढ़ते [...]




















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