हाथों की लकीरों में बनती है जिनकी तस्वीर
उनके ही दिल से जोड़ी है दिल की ज़ंजीर
हाथों पर लिखकर उनके नाम जब चूमे
तो उनके एहसासों की गहराइयों में हम डूबे
ख़ाबों में चलकर इक ऐसी सरहद पर रुके
वो फ़ासले कि सिर्फ़ उनके साये से हम मिले
यह सफ़र है एक नये दिन की शुरुआत
इसमें चलते रहने से ही [...]
Archive for January 12th, 2008
12 Jan




















कहते रहें Comments