Archive for January 10th, 2008

अपने तन की सौंधी ख़ुशबू से

अपने तन की सौंधी ख़ुशबू से
मुझको लिपटने दो…
अपने जिस्म की छुअन से मुझे
जलकर मिटने दो…
आओ ज़रा और क़रीब
साँसों को जिस्म से
लगकर सुलगने दो
बाँध लो तन को तन से
दूरियों के सब
बन्धन टूटने दो…
अपने तन की सौंधी ख़ुशबू से
मुझको लिपटने दो…
दिल में जलते हैं
चाहत के दिए
चाहत को तन से
लगकर बढ़ने दो…
कहे जो जिस्म’ जिस्म से
वह ज़बाँ पढ़ने [...]

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मुश्किल बड़ा यह प्यार है

मुश्किल बड़ा यह प्यार है
जीना इस प्यार में दुश्वार है
दिल में उसका ही ख़्याल है
लबों पर उसका ही नाम है
रब जाने कहाँ मेरा यार है
जिसके लिए दिल बेक़रार है
तेरे प्यार की यह राह है
तुझे ही ढूँढ़ती मेरी निगाह है
मुश्किल बड़ा यह प्यार है
जीना इस प्यार में दुश्वार है
जानाँ मुझे तेरा इन्तज़ार है
इश्क़ का तुझसे इक़रार [...]

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छोटा-सा क़तरा था वक़्त से काटा था

छोटा-सा क़तरा था वक़्त से काटा था
जब तक वह रहा हर लम्हा रहा
जब वह नहीं तो कुछ भी नहीं,
न साँसों का वह हरा मौसम रहा…
आशियाँ रेत का लहरों में ढल गया है
मेरा लिखा हुआ काग़ज़ जल गया है
पत्तों से आती है पतझड़ की आहट
शाम बिछाती है रोज़ नयी चाहत…
छोटा-सा क़तरा था वक़्त से काटा था
रंगीन [...]

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तुम हो जहाँ भी लौटके आ जाओ

तुम हो जहाँ भी लौटके आ जाओ
तोड़के के रस्में सारी मुझसे मिल जाओ
नेक इरादे थे सच्चे वह वादे थे
हमने निभाये थे तुमने सिखाये थे
कोई जो कहता है यह ख़ाब है कोई
बतायें हम उसको यह यार है वही
चाँद-सितारों में आपस की दूरी है
हमसे न मिलने आये कैसी यह देरी है
मुझको यक़ीं है तुम आओगे कभी
वह वादे [...]

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आ जाओ सनम

आ जाओ सनम
न जी सकेंगे बिछड़के हम
आ जाओ सनम
तुम आ जाओ सनम
न जी सकेंगे बिछड़के हम
तुम थे जब तलक
ज़िन्दगी में रोशनी ही रोशनी थी
चाँद को ताकते थे रातों में
और साथ में चाँद के चाँदनी थी
पेड़ों पर फूलों का मौसम था
बारिश में भीगा गीला सावन था
ख़ुशहाली थी हरियाली थी
दिल से दूर ग़म का बादल था
आ जाओ [...]

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