28
Dec
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: हुस्न, इश्क़, heart, love, blame, frozen, eyes, दिल, प्यार, ख़ुशबू, मुक़ाम, मोहब्बत, दीवाना, आँखें, crazy, destiny, fate, fragrance, offish, सिलसिला, beauty, बेवफ़ा, stranger, tears, final destination, अश्क, mad, result, lover, cheater, pious, तक़दीर, इल्ज़ाम, ग़ैर, girl, words, अन्जाम, जानाँ, पाकीज़ा, दुश्नाम, abuse, continuity, हिना, mehdi, बर्क़, lightening, ग़ुलाम, servent, slave, हुज़ूर, in front, सलाम, wishes, हर्फ़, मुक़र्रर. Leave a Comment
बेवफ़ा कहकर तुझको कोई इल्ज़ाम न दूँगा
अपनी पाकीज़ा मोहब्बत को दुश्नाम न दूँगा
उन सिलसिलों की ख़ुशबू आज भी आँखों में रची है
इस रंगे-हिना को अश्कों का अन्जाम न दूँगा
तेरे हुस्न की बर्क़ ने मारा है दीवाना करके
तेरा ग़ुलाम हूँ किसी के हुज़ूर में सलाम न दूँगा
तू हर्फ़े-मुक़र्रर है मेरी तक़दीर में जानाँ
मैं किसी भी ग़ैर को अपने दिल में मुक़ाम न दूँगा
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३