20
Dec
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: angry, annoyed, इल्म, इश्क़, कोसना, ख़ाब, ख़फ़ा, दाग़, नशात, नज़्म, प्यार, मोहब्बत, रूह, सावन, क़ल्म, क़िस्मत, ज़ख़्म, ज़ोफ़, फ़ुरसत, blame, curse, cut, destiny, dream, fate, freetime, happy, kith, knowledge, love, poem, rainy season, scar, soul, spot, weak. Leave a Comment
दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए
वह ख़फ़ा हुआ हम ख़त्म हुए
कोसूँ क्या अपनी क़िस्मत को
हमें भी कुछ नये इल्म हुए
हम गुलशने-रूह थे कभी
बिग़ैर जानाँ के ज़ोफ़ जिस्म हुए
नशात ज़मीं देखी सावन में
अब अधूरी एक नज़्म हुए
फ़ुरसत में भी फ़ुरसत नहीं
रोज़ ही मेरे ख़ाब क़ल्म हुए
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३