रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं
चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - तन्हा रहता है
पलकों पर शबनम के क़तरे फीका-फीका चाँद
और गली में सब सूखा-सूखा बंजर-सा रहता है
न फूल नकहता है न कोपल कोई खुलती है
गुलाबी बेलों पर सब बेरंग ख़ुश्क – सा रहता है
काली रातों-सी तेरी लटें वो जिनमें जी उलझा था
उनका तो अब आँखों [...]
Archive for December 20th, 2007
20 Dec
दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए
दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए
वह ख़फ़ा हुआ हम ख़त्म हुए
कोसूँ क्या अपनी क़िस्मत को
हमें भी कुछ नये इल्म हुए
हम गुलशने-रूह थे कभी
बिग़ैर जानाँ के ज़ोफ़ जिस्म हुए
नशात ज़मीं देखी सावन में
अब अधूरी एक नज़्म हुए
फ़ुरसत में भी फ़ुरसत नहीं
रोज़ ही मेरे ख़ाब क़ल्म हुए
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
20 Dec
तेरे दिल के दफ़्तर में मेरी अरज़ी दर्ज़ है
तेरे दिल के दफ़्तर में मेरी अरज़ी दर्ज़ है
तुम सुलझाओ मेरा मसला तुम्हारा फ़र्ज़ है
शरीक़ कर लो अपनी मशरूफ़िअत में मुझे
मेरे सीने में जो उठा है तुम्हारा दर्द है
तेरे ख़ातिर में जगह ख़ाली है आँखों से बयाँ हैं
रख लो उसमें मुझे ज़माना बड़ा ख़ुदगर्ज़ है
तवक़्क़ो है तुमपे दीदए-रोज़े-अव्वल से
तेरे दीवाने का तुझे दिले-मस्ताना अर्ज़ है
शख़्सियत [...]
20 Dec
ऐसा नहीं मेरे गुलशन में कोई फूल नहीं
ऐसा नहीं मेरे गुलशन में कोई फूल नहीं
है तो मगर उसमें कोई ख़ुशबू नहीं
उसकी बातें ग़ज़ल जैसी हैं उदास मगर
उनमें निख्खा तड़प है उर्दू नहीं
ज़हन में हैं उलझनों के पहाड़ काटे कोई
शिक़वा है जिससे वो ख़ुदा है अदू नहीं
तमन्ना है उससे कभी अपना हाल बयाँ हो
दिल है मेरा चाक उसपे रफ़ू नहीं
प्यार में मेरे अंदाज़ [...]
20 Dec
मैं ग़लत हूँ तू सही है
मैं ग़लत हूँ तू सही है
बात समझी जो मैंने कही है
अफ़साना झूठा हुआ तो क्या
दिल का इरादा तो सही है
सौदे किये ज़ियाँ उठाया
नफ़े की उम्मीद तो रही है
न नहीं किया किसी बात को
जी-हुज़ूरी में भी बुराई है
आँसू आँख की ज़ीनत नहीं
इनके लिए रूख़े-यार ही है
कौन समझाये न हो उदास
तरीक़ा जीने को यही है
जिसने की जफ़ा [...]




















कहते रहें Comments