क़लक़ इक हनोज़ है दिल में
आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में
आहो-फ़ुगाँ खा़मोश है दिल में
मैं दीदारे-दिलनशीं को बेताब हूँ
क़लक़ इक हनोज़ है दिल में
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३-२००४
December 16, 2007 at 11:51 pm (फुटकर कलाम) (ache, आतिश, इश्क़, खा़मोश, दिलनशीं, दोज़ख़, प्यार, बेताब, मोहब्बत, सोज़, हनोज़, क़लक़, crazy, fire, heart stealer, hell, love, pain, silence, till now)
आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में
आहो-फ़ुगाँ खा़मोश है दिल में
मैं दीदारे-दिलनशीं को बेताब हूँ
क़लक़ इक हनोज़ है दिल में
XHTML · CSS · Theme: Dusk by Beccary. Blog at WordPress.com.