आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में
आहो-फ़ुगाँ खा़मोश है दिल में
मैं दीदारे-दिलनशीं को बेताब हूँ
क़लक़ इक हनोज़ है दिल में
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३-२००४
16 Dec
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: ache, आतिश, इश्क़, खा़मोश, दिलनशीं, दोज़ख़, प्यार, बेताब, मोहब्बत, सोज़, हनोज़, क़लक़, crazy, fire, heart stealer, hell, love, pain, silence, till now. Leave a Comment
आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में
आहो-फ़ुगाँ खा़मोश है दिल में
मैं दीदारे-दिलनशीं को बेताब हूँ
क़लक़ इक हनोज़ है दिल में
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