खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप
अब यह आलम है दिलो-ज़हन का
करता हूँ हर शै में तुझे महसूस
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३-२००४
16 Dec
Posted by विनय in रुबाइयाँ. Tagged: आलम, इश्क़, धूप, प्यार, भीनी, महसूस, मोहब्बत, रंग, ज़हन, colour, feeling, fresh, love, mind, sunlight, world. Leave a Comment
खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप
अब यह आलम है दिलो-ज़हन का
करता हूँ हर शै में तुझे महसूस
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