खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप
अब यह आलम है दिलो-ज़हन का
करता हूँ हर शै में तुझे महसूस
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३-२००४
December 16, 2007 at 11:53 pm (फुटकर कलाम) (आलम, इश्क़, धूप, प्यार, भीनी, महसूस, मोहब्बत, रंग, ज़हन, colour, feeling, fresh, love, mind, sunlight, world)
खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप
अब यह आलम है दिलो-ज़हन का
करता हूँ हर शै में तुझे महसूस
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