16
Dec
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: angle, इश्क़, ख़ार, ख़ुदा, ख़ुशबू, जीवन, जुदा, टूकड़ा, ताउम्र, दर्द, दिल, पलाश, पेशानी, प्यार, बर्फ़, माहताब, मोड़, मोहब्बत, मौत, संगदिल, सर्द, साँस, सीना, सज़ा, हिज्र, bosom, breath, chest, cold, death, dhak, forehead, fragrance, full life, god, heart, ice, jail, life, love, moon, pain, piece, pin, separate, separation, stone-hearted. Leave a Comment
दिल में फिर वही दर्द उठा है
तेरा हिज्र मौत से बड़ी सज़ा है
ये रक़ाबी माहताब की सर्द पेशानी
जैसे साँसों में बर्फ़ का टुकड़ा है
इक ख़ार चुभा है कब से सीने में
वो संगदिल आज मेरा ख़ुदा है
गुले-पलाश की तरह मेरा जीवन
जुदा ख़ुशबू से ताउम्र जुदा है
‘नज़र’ को जहाँ तुम छोड़ गये थे
वह आज भी उसी मोड़ पे खड़ा है
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२