Archive for September 20th, 2007
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Sep
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: acceptance, agree, apart, आश्ना, इश्क़, कमनसीब, ख़ाहिश, जबीं, तदबीर, तस्लीम, तस्वीर, तहरीर, तक़दीर, दर्द, दिल, नसीब, नाकाम, नज़र, पाँव, प्यार, बंधन, मन, मरासिम, मोड़, मोहब्बत, रब्त, रिश्ता, साँस, सफ़र, हमनफ़स, हिज्र, ज़ंजीर, ज़िन्दगी, फ़ासला, फ़ुरक़त, breath, chain, desire, destiny, distance, fail, fate, feet, forehead, friend, heart, journey, life, line, love, luck, mind, pain, photograph, picture, relation, sight, trick, twist, unlucky. 2 Comments
मैं जो तुम्हें देखता हूँ मुझको देखती हैं तेरी तस्वीरें
साँस लेता हूँ मगर कमनसीब हैं हाथों की लक़ीरें
न ही कोई रब्त न ही रिश्ता न मरासिम न बंधन
फिर मेरे मन में पड़ रही हैं किसकी तसलीम की ज़ंजीरें
पाँव मोड़ दर मोड़ चलके इस मोड़ तक आये थे
शायद इसीलिए नाकाम हैं खा़हिशों की सारी तदबीरें
जबींसाई से [...]
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20
Sep
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: adore, attraction, अबरू, अक़ीदत, आगोश, इबादत, कशिश, ख़ूबसूरत, गुल, गुलाब, गुलाबी, चाँद, चाहत, जन्नत, डोरी, तब्बसुम, तिश्ना, दर्द, नशा, नसीब, निस्बत, प्यार, बहार, बोसा, मिन्नत, मोहब्बत, सनम, हसरत, हूर, क़िस्मत, ज़िन्दगी, ज़ुल्फ़, फ़िज़ा, beautiful, beg, comparison, desire, destiny, eyebrow, fairy, fate, flower, hair, heaven, in arms, kiss, life, love, lover, luck, metaphore, moon, pain, pink, reation, rose, spring, stone, thirsty, thread, tranquility, vicinity, worship. Leave a Comment
है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत है
तुम मुझको मिले हो यह मेरी क़िस्मत है
तेरे तब्बसुम से ही है यह रंगे-बहार
लगता है अब जैसे सारी फ़िज़ा जन्नत है
तेरी आँखों की गुलाबी डोरियाँ जैसे नश्शा-ए-मै
तिश्ना-लब हूँ मुझे पीने की हसरत है
तेरी ज़ुल्फ़ों से गुज़रते देखी है मैंने सबा
हाए! यह सबा भी कितनी खु़श-क़िस्मत है
तेरे [...]
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20
Sep
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: धूप, इश्क़, love, haze, प्यार, मंज़िल, मोहब्बत, सफ़र, चाहत, दुआ, नज़र, असर, राह, journey, desire, cruelty, नगर, way, final destination, sight, sunlight, गली, street, कोहरा, fog, city, सितम, road, pray, effect, रहगुज़र. Leave a Comment
हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं
हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं
तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम
तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं
कौन दूसरा होगा हम-सा सितम-परस्त
हम अपना-सा कोई जिगर ढूँढ़ते हैं
जो राह मंज़िल तक पँहुचती होगी
तेरी चाहत में ऐसी रहगुज़र ढूँढ़ते हैं
धूप छुप गयी है कोहरे से भरी वादियों में
और हम हैं [...]
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20
Sep
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: अबस, आरज़ू, इश्क़, ख़ाहिश, गुफ़्तगू, गुफ़्तार, जुस्त-जू, दर्द, नज़र, प्यार, बाज़ू, माज़ी, मुब्तिला, मोहब्बत, मौसम, सू, हसरत, chained, desire, hand, love, pain, past, search, season, side, sight, talk, waste, wish. Leave a Comment
हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी
तुमको पाने की जुस्तजू छोड़ दी
चाक़ जिगर को गरेबाँ में छिपाके
हमने हसरते-रफ़ू छोड़ दी
बुलाता रहा माज़ी पलट-पलट के
मगर अब इश्क़ की खू़ छोड़ दी
मैं हूँ अधूरी खा़हिशों का मुब्तिला
ग़ालिबन हमने वो बाज़ू छोड़ दी
है आज मौसम बदला-बदला
वो गुफ़्तार वो गुफ़्तगू छोड़ दी
हर जगह पाओगे तुम मुझको
मैंने मेरी नज़र चार-सू छोड़ [...]
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Sep
Posted by विनय in मेरी ग़ज़ल. Tagged: आदत, कहानी, ग़लफ़हमी, नमक, नाम, बुरा, मतलब, माज़ी, मिर्च, लहू, लोग, वक़्त, हमदर्द, क़िस्सा, ज़ख़्म, bad, blood, chilly, friend, habit, mean, misunderstanding, name, pain, past, people, salt, story, time. Leave a Comment
माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग
बेतरह मतलब निकालते हैं लोग
हुआ कब मुझ से उनका बुरा
किसलिए नाम मेरा उछालते हैं लोग
ग़लतफ़हमियों की आदत है उन्हें
ग़लतफ़हमियाँ पालते हैं लोग
अपनी पे जब बन आयी है तो देखा है
किस तरह मुझे टालते हैं लोग
मुझे जो देखते हैं गिरता हुआ कहीं
दिखावे के लिए सँभालते हैं लोग
किस तरह यारब समझाऊँ इन्हें
मेरे [...]
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